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निजी अस्पतालों में आरजीएचएस इलाज की व्यवस्था तीसरे दिन भी ठप, बिलों के बोझ तले दबे मरीज
By Lokjeewan Daily - 16-04-2026

भीलवाड़ा लोकजीवन। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम  के तहत मिलने वाला कैशलेस इलाज भीलवाड़ा सहित पूरे प्रदेश में तीसरे दिन भी पूरी तरह ठप रहा। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन  के आह्वान पर निजी अस्पतालों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, जिसका सीधा खामियाजा शहर के हजारों सरकारी कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनर्स को भुगतना पड़ रहा है।  मंगलवार रात से शुरू हुआ यह गतिरोध गुरुवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गया। शहर के प्रमुख 10 निजी अस्पतालों में आरजीएचएस से जुड़ी ओपीडी, आईपीडी और यहाँ तक कि जांचें और इमरजेंसी सेवाएं भी पूरी तरह बंद रहीं। अस्पतालों के बाहर  कैशलेस सुविधा बंद है के बोर्ड देखकर इलाज के लिए पहुंचे मरीजों के चेहरों पर मायूसी और आक्रोश साफ नजर आया। जो मरीज भर्ती थे, उन्हें या तो डिस्चार्ज कर दिया गया या फिर उनसे नकद भुगतान की मांग की गई।
पेंशनर्स की बढ़ी मुसीबत, जेब पर पड़ा भारी बोझ
इस हड़ताल का सबसे बुरा असर उन बुजुर्ग पेंशनर्स पर पड़ा है जो पूरी तरह इस योजना पर निर्भर हैं। कई बुजुर्गों को दवाइयों और रूटीन चेकअप के लिए अपनी जमा-पूंजी खर्च करनी पड़ी, तो कई बिना इलाज के ही भारी मन से घर लौट गए। स्थिति यह है कि मध्यमवर्गीय कर्मचारियों को भी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अचानक हजारों रुपयों का इंतजाम करना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा दबाव, एमजीएच में भीड़
निजी अस्पतालों के हाथ खींचने के बाद मरीजों का पूरा रुख महात्मा गांधी अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की ओर हो गया है। सरकारी अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढऩे से  लंबी कतारों के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त प्रशासनिक और चिकित्सा दबाव बन गया है।
करोड़ों का भुगतान बकाया, डॉक्टरों में भारी आक्रोश
आइएमए भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष डॉ. दुष्यंत शर्मा ने कड़े शब्दों में कहा कि यह लड़ाई मजबूरी में लडऩी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि  जिले के निजी अस्पतालों का लगभग 18 करोड़ रुपय  का भुगतान पिछले 8 महीनों से अटका हुआ है। पूरे राजस्थान में यह आंकड़ा  900 करोड़ रुपये  के पार पहुंच चुका है। डॉक्टरों का आरोप है कि भुगतान न होने और ऊपर से डॉ. सोनदेव बंसल की गिरफ्तारी व भारी पेनल्टी जैसे कदमों ने चिकित्सकों को डरा दिया है। जब तक सरकार स्पष्ट नीति नहीं बनाती और बकाया भुगतान नहीं करती, यह गतिरोध समाप्त होना मुश्किल है। 

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